मत्स्य विभाग उत्तराखंड

जलाशयों का विअकास (प्राकृतिक जलस्रोतों में मत्यासिकी संरक्षण एवं संवर्धन )

राज्यों में जल स्रोत यथा नदियाँ, जाल्शय, झील, पोखर आदि प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं जिनमे से मत्य्सिकी की प्रचुर सम्भावनाएं हैं | इन प्रकृतिक श्रोतों में अवैज्ञानिक तरीकों से दोहन के कारण मत्स्य सम्पदा का लगातार ह्रास होता जा रहा है, यहाँ तक कि कुछ प्रजातियाँ विलुप्ति की कगार पर पहुँच गयी हैं I इसके अतिरिक्त जल प्रदुषण तथा मछलियों के प्रकृति निवास स्थल में बदलाव के कारण असंतुलन की स्थिति से हुए ह्रास के कारण प्रकृति स्रोतों में मत्स्य सम्पदा का संरक्षण आवश्यक है I यह योजना राज्यों के सभी जनपदों में संचालित की जा रही है जिसके अंतर्गत जनपद में उपलब्ध प्राकृतिक जल स्रोतों में मत्स्यिक संरक्षण, मत्स्य बीज संचय, जन चेतना एवं मत्स्य संवर्द्धन का कार्य किया जाता है I

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