मत्स्य विभाग उत्तराखंड

अनुसूचित जाति उप योजना (एस० सी० एस० पी०)

राज्य की अनुसूचित जाति के मत्स्य पलकों के सामाजिक एवं आर्थिक उन्नति हेतु अनुसूचित जाति उपयोजना, मत्स्य पालन सम्बन्धी कार्यक्रमों कों बढावा दिए जाने के लिए संचालित कि जा रही है | योजना का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जातियों के व्यक्तियों कों रोजगार उपलब्ध कराना, उध्यमिता विकास करना एवं उनकी आर्थिक सिथिति कों सुदृढ़ करना है | इस उपयोजना में निम्नलिखित कार्य किये जाते हैं –

(१) मैदानी तालाब निर्माण – मैदानी क्षेत्र में अनुसूचित जाति के व्यक्तियों कों तालाब निर्माण हेतु 0.20 हैक्टेयर / यूनिट के क्षेत्रफल की कुल लागत ’60,000/- पर 70% का अनुदान ’42,000/- देये है | इन्ही मानकों के अनुसार प्रथम वर्ष के मत्स्य निवेश हेतु ’10,000/- पर 70% का अनुदान ‘7000/- देये है | इस प्रकार निर्माण एवं निवेश हेतु ’70,000/- प्रति 0.20 हैक्टेयर पर 70% अनुदान ’49,000/- देये है | एक लाभार्थी अधिकतम तीन यूनिट तक अनुदान प्राप्त कर सकता है |

(२) पर्वतीय तालाब निर्माण – पर्वतीय क्षेत्र में अनुसूचित जाति के व्यक्तियों के तालाब निर्माण हेतु 0.01 हैक्टेयर (यूनिट) के क्षेत्रफल की निवेश सहित कुल लगत ’60,000/- पर 70% अनुदान ’42,000/- देये है एवं 30% लाभार्थी स्वयं वहन करेगा | एक लाभार्थी अधिकतम तीन यूनिट तक अनुदान प्राप्त कर सकता है |

(३) प्रशिक्षण – योजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति के मत्स्य पालकों कों पर्वतीय/मैदानी क्षेत्रों में दस दिवसीय प्रशिक्षण दिया जाता है | कृषि मंत्रालय भारत सरकार के मानकों के अनुसार ‘125/- प्रतिदिन प्रति व्यक्ति कि दर से मानदेय तथा ‘250/- प्रति व्यक्ति क्षेत्र भ्रमण पर देये है |

(४) फिल्ड ट्रिप – अनुसूचित जाति के मत्स्य पालकों में मत्स्य पालन कों बढ़ावा दिए जाने एवं तकनिकी जानकारी देने हेतु उत्तराखंड एवं निकटवर्ती प्रदेशों का भ्रमण कराया जाता है |

(५) प्रचार – प्रसार – लाभार्थीयों को मत्स्य पालन सम्बन्धी साहित्य उपलब्ध कराया जाता है एवं जिला स्तर पे कार्यशाला एवं गोष्ठीउओं के माध्यम से प्रचार – प्रसार किया जा रहा है |

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